देहरादून। उत्तराखंड के टिहरी जिले में हेंवल नदी पुनर्जीवन के लिए संचालित मॉडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्यान आकर्षित किया है। रविवार को प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री द्वारा इस पहल का उल्लेख किए जाने के बाद यह मॉडल एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पहाड़ों में सूखते जलस्रोतों और घटते जल प्रवाह की चुनौती के बीच यह अभियान जल संरक्षण, पर्यावरण सुधार और ग्रामीण आजीविका को एक साथ जोड़ने की प्रभावी पहल के रूप में उभरा है। करीब 26 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में संचालित इस अभियान का उद्देश्य केवल नदी की धारा को पुनर्जीवित करना नहीं, बल्कि पूरे जलग्रहण क्षेत्र की पारिस्थितिकी को बेहतर बनाना है। हेंवल नदी पुनर्जीवन की यह पहल वर्ष 2018-19 में तत्कालीन नरेंद्रनगर वन प्रभाग में आईएफएस अधिकारी धर्म सिंह मीणा के नेतृत्व में शुरू की गई थी। इसके तहत अब तक 126 प्राकृतिक जलस्रोतों और 28 गदेरों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया गया। अभियान में वर्षाजल संचयन, चाल-खाल निर्माण, चेकडैम, पुनर्भरण गड्ढों और स्थानीय प्रजातियों के पौधरोपण जैसे उपाय अपनाए गए। इन प्रयासों का उद्देश्य वर्षा के पानी को संरक्षित करना, मिट्टी में नमी बनाए रखना और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देना है। परियोजना के आकलनों के अनुसार, मूल्यांकित क्षेत्रों में जलस्रोतों के प्रवाह में करीब 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
जल संरक्षण के साथ आजीविका पर भी जोर
इस मॉडल की खासियत यह है कि इसमें प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी और आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी प्राथमिकता दी गई है। परियोजना के तहत 34 हेंवल धारा संरक्षण समितियों के माध्यम से ग्रामीणों को जलस्रोतों की सुरक्षा और संरक्षण से जोड़ा गया है। इसके अलावा डेयरी, मधुमक्खी पालन और पौधशाला जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित कर ग्रामीणों के लिए आजीविका के अवसर विकसित किए जा रहे हैं। परियोजना के अनुसार, डेयरी गतिविधियों से 500 से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। इससे जल संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
धर्म सिंह मीणा को मिला इको-वॉरियर अवार्ड
हेंवल नदी पुनर्जीवन अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले आईएफएस अधिकारी धर्म सिंह मीणा को उनके पर्यावरण संरक्षण संबंधी प्रयासों के लिए इको-वॉरियर अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह सम्मान केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रदान किया। प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ में इस मॉडल का उल्लेख उत्तराखंड में सामुदायिक भागीदारी से किए जा रहे जल संरक्षण प्रयासों को व्यापक पहचान देने वाला माना जा रहा है। हेंवल नदी पुनर्जीवन मॉडल यह संदेश देता है कि स्थानीय संसाधनों, वैज्ञानिक उपायों और जनसहभागिता के समन्वय से जल संकट से निपटने के साथ पर्यावरण और ग्रामीण आजीविका को भी मजबूती दी जा सकती है।


