विकासनगर। पहाड़ की ऊंची चोटी, चारों ओर फैली हरियाली और बादलों से घिरे आसमान के बीच स्थित मटोगी गांव का ध्यान धारेश्वर महादेव मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। विकासनगर ब्लॉक (पछवादून) में मसूरी के प्रसिद्ध भादराज मंदिर के पीछे स्थित यह पावन धाम केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं है, बल्कि योग, ध्यान और आत्मिक शांति का एक अद्भुत संगम है। काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर की तर्ज पर बनी भगवान शिव की विशाल प्रतिमा और परिसर में स्थापित नौ शिवलिंग इस मंदिर को धार्मिक व भौगोलिक दृष्टि से बेहद खास बनाते हैं। यह सिर्फ भगवान शिव की आराधना का स्थल नहीं है, बल्कि प्रकृति, ध्यान व अध्यात्म का ऐसा संगम है, जहां कुछ पल बिताना भी मन को सुकून देता है।
पहाड़ की ऊंचाई पर स्थित मंदिर से चारों ओर दिखाई देने वाला विहंगम दृश्य यहां आने वाले श्रद्धालुओं ओर प्रकृति प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। ध्यान धारेश्वर महादेव मंदिर का नाम ही इसकी खासियत को बयां करता है। यहां भगवान शिव के दर्शन व पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालु शांत वातावरण में योग और मेडिटेशन भी करते हैं। शहरों की आपाधापी से दूर पहाड़ों के बीच कुछ समय ध्यान में बिताना लोगों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है। मंदिर परिसर में स्थापित भगवान शिव की विशाल प्रतिमा भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। बताया जाता है कि यह प्रतिमा नेपाल के काठमांडू स्थित प्रसिद्ध पशुपतिनाथ क्षेत्र में स्थापित शिव प्रतिमा के स्वरूप और आकार से प्रेरित है।
मंदिर परिसर की एक और विशेषता यहां स्थापित नौ शिवलिंगों का समूह है। श्रद्धालु एक साथ सभी शिवलिंगों के दर्शन व पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक आयोजनों और विशेष अवसरों पर यहां आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मटोगी के अलावा लांघा, पास्टा, पिपलसार, खुलेत और मदरसू क्षेत्र के लोगों की भी मंदिर के प्रति गहरी आस्था है। सावन के महीने में यहां शिवभक्तों की आवाजाही और बढ़ जाती है।
मंदिर की खूबसूरती केवल इसकी धार्मिक पहचान तक सीमित नहीं है। इसकी भौगोलिक स्थिति भी इसे खास बनाती है। मसूरी के प्रसिद्ध भादराज मंदिर के पीछे ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर से पछवादून क्षेत्र का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। नीचे दूर तक फैली पहाड़ी ढलानें, हरियाली से ढके जंगल और बदलते मौसम के साथ बदलता आसमान यहां आने वाले हर व्यक्ति को कुछ देर ठहरने के लिए मजबूर कर देता है। यही वजह है कि मंदिर में श्रद्धालुओं के साथ प्रकृति प्रेमियों की भी रुचि बढ़ रही है।
मंदिर धीरे-धीरे पछवादून क्षेत्र की धार्मिक पहचान के साथ एक ऐसे आध्यात्मिक स्थल के रूप में अपनी अलग पहचान बना रहा है, जहां श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के साथ प्रकृति की शांति का अनुभव कर सकते हैं। शायद यही इस मंदिर की सबसे बड़ी खूबसूरती है कि यहां आने वाला व्यक्ति केवल शिव के दर्शन करके नहीं लौटता, बल्कि पहाड़ों की शांति, प्रकृति की सुंदरता और ध्यान की अनुभूति को भी अपने साथ लेकर जाता है।


