मृदा स्वास्थ्य संवर्धन: HURL और पतंजलि की बड़ी पहल, ‘धरती का डॉक्टर’ मशीन से किसानों को मिलेगी मिट्टी की निशुल्क जांच

Pahad Update

देहरादून। किसानों को मिट्टी की सेहत के अनुसार उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल सिखाने और खेती की लागत घटाने के उद्देश्य से हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (HURL) ने पतंजलि समूह की ‘धरती का डॉक्टर’ स्वचालित मृदा परीक्षण मशीन को अपनाया है। इस पहल के तहत उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न जिलों में 9 अत्याधुनिक डिजिटल मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं, जहाँ किसान निशुल्क अपनी मिट्टी का परीक्षण करा सकते हैं। केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (CSSRI) द्वारा परीक्षित यह तकनीक महज 40 मिनट में 12 प्रमुख घटकों की सटीक जांच कर और जियो-टैगिंग की मदद से अन्नदाताओं को संतुलित खाद उपयोग की वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध करा रही है। इस आधुनिक डिजिटल तकनीक का मुख्य उद्देश्य किसानों को अनुमान के आधार पर यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल से बचाना तथा मिट्टी में मौजूद प्राकृतिक पोषक तत्वों के सटीक आधार पर संतुलित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने की उचित सलाह देना है।

एचयूआरएल के प्रबंध निदेशक एसपी मोहंती के अनुसार, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर समेत पूर्वांचल के विभिन्न जिलों, मेरठ और बिहार के बक्सर सहित अन्य प्रमुख क्षेत्रों में यह महत्वपूर्ण मृदा परीक्षण सुविधाएं स्थापित की गई हैं, जिससे जमीनी स्तर पर अन्नदाताओं को सीधा और बड़ा लाभ मिल रहा है। पारंपरिक रूप से किसान बिना वैज्ञानिक जांच के ही अंधाधुंध रासायनिक खादों का प्रयोग करते थे, जिससे न केवल खेती की लागत बढ़ती थी बल्कि मिट्टी की उपजाऊ क्षमता पर भी विपरीत असर पड़ता था। अब इस डिजिटल क्रांति के जरिए खेत की वास्तविक जरूरत का सही आंकलन संभव हो सकेगा। इस पूरी प्रक्रिया से मिट्टी की अम्लीय या क्षारीय स्थिति के साथ-साथ सभी आवश्यक पोषक तत्वों की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन किया जा सकता है।

करनाल स्थित केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ विशेषज्ञों द्वारा इस पूरी मशीन का कड़ाई से परीक्षण भी किया गया है और परीक्षण के बाद इसे सभी बारह मानकों की जांच करने में पूरी तरह सक्षम पाया गया है। कंपनी का साफ तौर पर यह मानना है कि इस अनूठी पहल का उद्देश्य केवल रासायनिक उर्वरकों की खपत को कम करना ही नहीं है, बल्कि खेत की वास्तविक और जमीनी जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों का संतुलित इस्तेमाल सुनिश्चित करना भी है। इससे किसानों का अनावश्यक उर्वरक खर्च काफी हद तक कम होगा, लंबे समय तक मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता बनी रहेगी और फसल प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक रूप दिया जा सकेगा।

खेती की लागत घटाने में मददगार साबित हो रही यह तकनीक पीएच, विद्युत चालकता, जैविक कार्बन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, सल्फर, जिंक, आयरन, कॉपर, मैंगनीज और बोरॉन समेत कुल बारह प्रमुख मानकों की सूक्ष्मता से जांच करती है। मशीन की यह पूरी जांच प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और तेज है, जिसमें मिट्टी के नमूने की सही जानकारी दर्ज करने के साथ जियो-टैगिंग जैसी आधुनिक डिजिटल सुविधाएं भी शामिल हैं और औसतन करीब चालीस मिनट के भीतर सटीक रिपोर्ट तैयार हो जाती है।

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