डिजिटल युग में बच्चों को किताबों से जोड़ने की पहल, डीएसबी परिसर में आयोजित हुआ पुस्तक दान महोत्सव

Pahad Update

नैनीताल। मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते दौर में बच्चों के भीतर पुस्तकों के प्रति घटती रुचि को देखते हुए डीएसबी परिसर में पुस्तक दान महोत्सव का आयोजन किया गया। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम में कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट और यूओयू के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने संयुक्त रूप से कहा कि इंटरनेट त्वरित जानकारी तो दे सकता है, लेकिन विषय की गहरी और विश्वसनीय समझ के लिए प्रामाणिक पुस्तकें आज भी सबसे सशक्त माध्यम हैं। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय हल्द्वानी के सौजन्य से आयोजित महोत्सव में विद्यार्थियों को पुस्तकों का महत्व समझाने के साथ नियमित अध्ययन की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया।

इस दौरान प्रतिष्ठित लेखकों की पुस्तकें वितरित कर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण साहित्य पढ़ने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिष्ट ने कहा कि इंटरनेट के दौर में सूचनाओं की उपलब्धता बढ़ी है, लेकिन पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है। इंटरनेट पर उपलब्ध हर जानकारी प्रमाणिक नहीं होती, जबकि पुस्तकें लेखन, संपादन और प्रूफ रीडिंग की प्रक्रिया से गुजरने के बाद प्रकाशित होती हैं। इसलिए पुस्तकों से मिलने वाला ज्ञान अधिक व्यवस्थित और विश्वसनीय होता है। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और कुलगीत के साथ हुआ। अतिथियों ने ठाकुर देव सिंह बिष्ट की प्रतिमा पर माल्यार्पण तथा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पुष्प अर्पित किए। पुस्तक दान के लिए प्रो. लोहनी को प्रशस्ति पत्र भेंट किया गया। दोनों कुलपतियों को शॉल और गणेश प्रतिमा देकर सम्मानित किया गया। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने कहा कि इंटरनेट और पुस्तकें एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि ज्ञान प्राप्ति के पूरक माध्यम हैं। इंटरनेट त्वरित जानकारी देता है, जबकि पुस्तकें विषय की गहरी और क्रमबद्ध समझ विकसित करती हैं। विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन के साथ नोट्स तैयार करने की आदत भी डालनी चाहिए।

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