तकलाकोट में भारी बर्फबारी की चेतावनी: भारत-चीन पारंपरिक सीमा व्यापार सत्र समय से पहले समाप्त, लिपुलेख दर्रे से सुरक्षित लौटे व्यापारी

Pahad Update

पिथौरागढ़/धारचूला। चीन के तकलाकोट क्षेत्र में भारी बर्फबारी और सीमांत हिमालयी दर्रों में मौसम के तेजी से बिगड़ते मिजाज को देखते हुए भारत-चीन पारंपरिक व्यापार इस वर्ष समय से पहले ही समाप्त हो गया है। तकलाकोट प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा चेतावनी के बाद व्यापार में जुटे सभी भारतीय व्यापारी अपना सामान समेटकर लिपुलेख दर्रे के रास्ते सुरक्षित स्वदेश लौट आए हैं। व्यापारियों की सुरक्षित वापसी के साथ ही इस साल के व्यापारिक सत्र का आधिकारिक समापन हो गया है। तकलाकोट और आसपास के उच्च हिमाचली इलाकों में 27 से 29 अक्टूबर के बीच भीषण बर्फबारी की आशंका जताई गई थी। दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण मौसम खराब होने पर लिपुलेख दर्रे और सीमांत मार्गों पर बर्फ जमा होने से आवागमन पूरी तरह ठप्प होने तथा व्यापारियों के वहां फंसने का गंभीर खतरा बना हुआ था। सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए तकलाकोट प्रशासन ने भारतीय व्यापारियों को 27 अक्टूबर से पूर्व हर हाल में क्षेत्र खाली करने के निर्देश दिए थे। निर्देश मिलते ही व्यापारियों ने तेजी से अपनी कारोबारी गतिविधियां समेटीं और 26 तथा 27 अक्टूबर को भारत सीमा में प्रवेश कर गए।

धारचूला के उपजिलाधिकारी (SDM) आशीष जोशी ने व्यापारिक आंकड़ों की पुष्टि करते हुए बताया कि इस वर्ष भारत-चीन पारंपरिक व्यापार के तहत भारतीय व्यापारियों द्वारा कुल ₹74,95,325 (लगभग 74.95 लाख रुपये) का सामान चीन को निर्यात किया गया। वहीं, चीनी क्षेत्र से ₹74,51,402 (लगभग 74.51 लाख रुपये) मूल्य की विभिन्न वस्तुओं का भारत में आयात किया गया। इस प्रकार दोनों ओर से लगभग संतुलित व्यापार दर्ज किया गया। भारत-चीन पारंपरिक सीमा व्यापार पिथौरागढ़ और धारचूला के सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था, स्थानीय जनजातीय समुदायों और व्यापारियों की आजीविका की रीढ़ माना जाता है। हर साल आयोजित होने वाले इस व्यापार से स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार और व्यापारिक अवसर प्राप्त होते हैं। हालांकि, इस बार कुदरत के कड़े तेवरों और समय से पहले आई बर्फबारी की चेतावनी के कारण व्यापारिक गतिविधियों को तय समय सीमा से पहले ही रोकना पड़ा। व्यापारियों की सुरक्षित वापसी पर स्थानीय प्रशासन और परिजनों ने राहत की सांस ली है। इस सत्र का समापन होने के बाद अब सीमांत क्षेत्र के कारोबारी, हस्तशिल्पी और व्यापारी विषम मौसम के बीतने और अगले वर्ष शुरू होने वाले नए व्यापारिक सत्र की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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