रुद्रप्रयाग/ऊखीमठ। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर प्रसिद्ध सिद्धपीठ कालीमठ धाम में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। भगवती काली के दिव्य दरबार में दर्शन और पूजन के लिए तड़के से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। नवरात्र के पावन पर्व पर मां भगवती के त्रिदिवसीय स्वरूपों—महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्यता और खुशहाली की कामना के साथ दरबार में शीश नवा रहे हैं।
इस पावन पर्व पर पूरे मंदिर परिसर को करीब 10 क्विंटल मनमोहक फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है। पुष्पों की सुगंध और रंग-बिरंगी सजावट से सजे मां के दरबार की अलौकिक दिव्यता देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो रहे हैं। चारों ओर गूंजते जयकारों और मंत्रोच्चार से संपूर्ण कालीमठ घाटी भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठी है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिद्धपीठ कालीमठ भगवती की आराधना के सबसे पवित्र और प्रमुख केंद्रों में से एक है। यहां नवरात्र के दिनों में किए जाने वाले अनुष्ठान, उपासना और दर्शन का विशेष धार्मिक पुण्यफल प्राप्त होता है। वेदपाठी रमेश चंद्र भट्ट ने बताया कि नवरात्र के नौ दिनों में मां भगवती की उपासना से श्रद्धालुओं को आत्मिक शुद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और लोकमंगल की प्रेरणा मिलती है। देवी उपासना भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति, साहस और धर्म की स्थापना का प्रतीक है।
वहीं, पण्डित दिनेश चंद्र गौड़ के अनुसार, यदि सच्ची श्रद्धा, संयम और सद्कर्म के साथ भगवती की आराधना की जाए, तो मनुष्य को अपार आत्मबल प्राप्त होता है। यह उपासना समाज में परस्पर सद्भाव, प्रेम और कल्याण की भावना को सुदृढ़ करती है। कालीमठ धाम में भक्तों की अटूट श्रद्धा, अनुष्ठानों की गूंज और पुष्पवर्षा के बीच शारदीय नवरात्र का यह महापर्व अत्यंत भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण के साथ मनाया जा रहा है।


