स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर डीएम सख्त: आंकड़ों में हेरफेर पर ANM निलंबित, प्रसूता मृत्यु मामलों की होगी GIS मैपिंग

Pahad Update

देहरादून। स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही और मनमानी पर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कड़ा रुख अपनाया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की समीक्षा बैठक के दौरान मातृ मृत्यु मामले में आंकड़ों से छेड़छाड़ और बयानों में विरोधाभास पाए जाने पर एएनएम को तुरंत निलंबित करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही, प्रशासन ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान के लिए 5 वर्षों के आंकड़ों की जीआईएस मैपिंग कराने का निर्णय लिया है। इस वर्ष प्रसव के दौरान हुई 12 महिलाओं की मृत्यु के मामलों की गहन केस स्टडी की गई, जिनमें से चार मामलों में स्पष्ट आख्या तलब की गई।

प्रेमनगर निवासी रुखसाना की मौत के मामले में आशा और एएनएम के बयानों में विरोधाभास मिलने, आंकड़ों में छेड़छाड़ करने तथा साक्ष्य के रूप में गलत तारीख के फोटोग्राफ पेश करने का खुलासा हुआ। इस गंभीर लापरवाही पर जिलाधिकारी ने मौके पर ही एएनएम के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आमजन की जिंदगी से खिलवाड़ किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन अब मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में और अधिक कमी लाने के लिए पूरी तरह एक्शन मोड में है।

जिलाधिकारी ने पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण कर उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने और वहां स्वास्थ्य सुविधाओं को युद्धस्तर पर मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इन मामलों की निगरानी के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया है। साथ ही, दूरस्थ क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने, समय पर अस्पताल में भर्ती कराने तथा किसी भी प्रकार का जोखिम होने पर तत्काल उच्च स्वास्थ्य संस्थान में रेफर करने के निर्देश दिए गए हैं।

टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जांच का दायरा बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए प्रशासन ने ठोस कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों का जीआईएस मैपिंग के जरिए विश्लेषण किया जाएगा, ताकि उन क्षेत्रों को चिह्नित किया जा सके जहां मृत्यु दर लगातार अधिक रही है। घर पर होने वाले प्रसव के मामलों में आशा कार्यकत्री की जवाबदेही भी तय कर दी गई है। स्वास्थ्य संकेतकों के मामले में देहरादून जनपद का मातृ मृत्यु अनुपात 31.0 है जो वर्ष 2030 के राष्ट्रीय लक्ष्य से भी कम है, जबकि नवजात शिशु और शिशु मृत्यु दर भी संतोषजनक स्थिति में हैं। हालांकि, जन्म के समय लिंगानुपात 924.4 होने के कारण इस क्षेत्र में विशेष सुधार की आवश्यकता है।

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