उत्तराखंड में मौसम का बदला मिजाज: चारों धामों की चोटियों पर सीजन की पहली बर्फबारी, निचले इलाकों में बारिश से पारा लुढ़का; 5 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी

Pahad Update

देहरादून/विशेष रिपोर्ट: उत्तराखंड में मौसम ने एक बार फिर अचानक करवट ली है, जिससे देवभूमि के पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक ठंड का असर तेजी से बढ़ गया है। बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव और सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के संयुक्त असर के कारण पूरे प्रदेश में झमाझम बारिश और बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है। गुरुवार की सुबह से ही राजधानी देहरादून समेत कई निचले और मैदानी इलाकों में रुक-रुककर बारिश होने से तापमान में 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे अक्टूबर के महीने में ही लोगों को कड़ाके की सर्दी का अहसास होने लगा है। मैदानी इलाकों में जहां बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है, वहीं प्रदेश के प्रसिद्ध धामों—बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम सहित आसपास की ऊंची चोटियों पर झमाझम बर्फबारी हुई है। बर्फ की सफेद चादर से ढकी पहाड़ियों के कारण पहाड़ों में ठंड का प्रकोप अचानक काफी बढ़ गया है। अचानक आए इस मौसम बदलाव ने लोगों को अपने बक्से से गर्म स्वेटर, जैकेट और रजाईयां निकालने पर मजबूर कर दिया है। सुबह और शाम के समय ठंडी हवाओं के चलने से ठिठुरन काफी बढ़ गई है, जिससे आम जनजीवन और रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।

मौसम के इस बदले मिजाज का सीधा असर पर्वतीय क्षेत्रों में आवाजाही करने वाले लोगों और पर्यटकों पर पड़ रहा है। लगातार हो रही बारिश और पहाड़ी रास्तों पर कोहरे व कम दृश्यता के कारण वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ गई है। मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन ने ऊंचाई वाले इलाकों में यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी है। पर्वतीय मार्गों पर सफर करने वालों से अपील की गई है कि वे मौसम की अद्यतन स्थिति और ताजा जानकारी लेकर ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, उत्तराखंड में मौसम के तेवर अभी शुक्रवार को भी तीखे बने रहने की पूरी संभावना है। इसे देखते हुए मौसम विभाग ने राज्य के पांच प्रमुख पर्वतीय जिलों—नैनीताल, चंपावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चमोली के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में कहीं-कहीं तीव्र आकाशीय बिजली चमकने, भारी ओलावृष्टि होने तथा झक्कड़ हवाओं (तेज हवाओं) के साथ झमाझम बारिश होने की आशंका जताई गई है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में विशेष चौकसी बरतने के निर्देश दिए हैं।

प्रतिकूल मौसम और ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने नागरिकों और पर्यटकों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें। विशेषकर, आकाशीय बिजली और ओलावृष्टि की संभावना को देखते हुए लोगों को खुले स्थानों, खेतों और बड़े पेड़ों के नीचे खड़े होने से सख्ती से बचने की सलाह दी गई है। किसानों और बागवानों को भी अपनी उपज और फसलों को सुरक्षित स्थान पर रखने के निर्देश दिए गए हैं। लगातार हो रही बारिश और तापमान में दर्ज की जा रही निरंतर गिरावट के चलते आने वाले दिनों में ठंड का प्रभाव और अधिक गहरा सकता है। हालांकि, यह बारिश कृषि और पर्यावरण के दृष्टिकोण से कुछ हद तक फायदेमंद मानी जा रही है, लेकिन शीतकालीन सत्र की समय से पहले दस्तक ने पर्वतीय क्षेत्रों की कठिनाइयों को अवश्य बढ़ा दिया है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

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